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ऐसे खेली जाती है बरसाने की अनोखी लट्ठमार होली

ऐसे खेली जाती है बरसाने की अनोखी लट्ठमार होली

 

इस होली में राधा और भगवान कृष्ण के प्रेम का रस होता है। ये त्योहार राधा कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है।

होली का त्योहार दिन व दिन करीब आता जा रहा है। इसी बीच आज 3 मार्च से होलाष्टक शुरू हो गया है। ये होलाष्टक 9 मार्च तक रहेगा। इस त्योहार को लेकर बरसाना दुनियाभर में प्रसिद्ध है। आपको बता दें कि बरसाना की लट्ठमार होली खेली जाती है। इस होली में राधा और भगवान कृष्ण के प्रेम का रस होता है। ये त्योहार राधा कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है। साथ ही ब्रज की होली में समाज गायन विशेष स्थान रखता है। इसमें होली गीत और पद गायन की अनूठी परंपरा है।

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इसके अलावा इस त्योहार में पारंपरिक अंदाज में ठाकुरजी के सामने ब्रजवासी-सेवायत ब्रजभाषा में होली पदों का गायन करते हैं। होली मनाने के लिए ब्रज में देश-विदेशी से भक्तों का ताता लगता है। इस बीच कान्हा के गांव गोकुल में छड़ीमार होली खेलकर ये त्योहार मनाया जाता है। होली मनाते समय ज्यादा चोट न लग जाए इसलिए लाठी की बजाए छड़ी का इस्तेमाल किया जाता है।

आयोजन कार्यक्रम-

  • 3 मार्च के दिन बरसाने में लड्डू होली।
  • 4 मार्च के दिन बरसाने में लठमार होली।
  • 5 मार्च को नन्दगांव व रावल गांव में लठमार होली।
  • 6 मार्च को श्रीकृष्ण जन्मभूमि और बांके बिहारी मंदिर में सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ होली।
  • 7 मार्च को गोकुल में छड़ीमार होली।

लट्ठमार होली केवल बरसाने में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में भी काफी प्रसिद्ध है। लट्ठमार होली फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी के दिन बरसाने में मनाई जाती है। नवमी के दिन यहां का नजारा देखने लायक होता है। होली में लोग केवल डंडों से ही नहीं बल्कि रंगो और फूलों से भी होली खेलते हैं। बता दें कि ये परंपरा भगवान श्रीकृष्ण के समय से चली रही है। मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान कृष्ण अपने दोस्तों के साथ नंदगांव से बरसाना, राधा और उसकी सखियों के साथ होली मनाने जाते हैं। जिसके बाद गोपियां कृष्ण और उनके दोस्तों पर डंडे बरसाती हैं। इसमें होली खेलने वाले पुरुषों को हुरियारे और महिलाओं को हुरियारन कहा जाता है।